मेरे बड़े --

Saturday, August 2, 2014

माँ सेर तो मैं सवा सेर ....

नानी को खेलों से बहुत प्यार है ,कोई भी खेल छोड़ा नहीं होगा .....
और वही माँ और मामा को भी सिखाया ,मामा वालीबाल के खिलाड़ी और माँ नेशनल गोताखोर ........

इस समय माँ को सानिया बुलाते थे ज्यादातर लोग ....
जैसे मुझे अभी मेरीकोम .....
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बल्ले -बल्ले !

4 comments:

  1. वाह क्‍या बात है !!!!!

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  2. छू गये बापू के मन को आपके ये विचार - गॉड ब्लेस यू


    मै, सबसे पहले एक बेटी,फ़िर बहन,फ़िर सहेली,फ़िर पत्नी,फ़िर बहू, फ़िर माँ,फ़िर पिता,फ़िर वार्डन, फ़िर स्पोर्ट्स टीचर और फ़िलहाल "ब्लॊगर" के किरदार को निभाती हुई,"ईश्वर" द्वारा रचित "जीवन" नामक नाटक की एक पात्र।

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  3. आपका ब्लॉग देखकर अच्छा लगा. अंतरजाल पर हिंदी समृधि के लिए किया जा रहा आपका प्रयास सराहनीय है. कृपया अपने ब्लॉग को “ब्लॉगप्रहरी:एग्रीगेटर व हिंदी सोशल नेटवर्क” से जोड़ कर अधिक से अधिक पाठकों तक पहुचाएं. ब्लॉगप्रहरी भारत का सबसे आधुनिक और सम्पूर्ण ब्लॉग मंच है. ब्लॉगप्रहरी ब्लॉग डायरेक्टरी, माइक्रो ब्लॉग, सोशल नेटवर्क, ब्लॉग रैंकिंग, एग्रीगेटर और ब्लॉग से आमदनी की सुविधाओं के साथ एक सम्पूर्ण मंच प्रदान करता है.
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बस! आपका आशीष बना रहे ...